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देश की शान हो तुम...

हमारा अभिमान हो तुम, देश की शान हो तुम। तुम सरहदों पे खड़े हो, तिरंगे की आन हो तुम। तुम्हारे जागने से हम सोते हैं, तुम्हारे होने से ही हम होते हैं। हर मंदिर की आरती, हर मस्जिद की अज़ान हो तुम। हमारा अभिमान हो तुम, देश की शान हो तुम।। भूकंप से लेकर बाढ़ तक, बोरवेल के राड़ तक। मैदानों की आग से लेकर, कश्मीर के पथराव तक। याद तुम्हारी आती है, आतंक के आकाओं तक। तुम हो इस देश की जमीन, और आसमान हो तुम। हमारा अभिमान हो तुम, देश की शान हो तुम।। घर से दूर सरहद पर, देश की रक्षा को सदैव तत्पर। जाड़ा, गर्मी या बरसात, कर सकें ना कोई असर तुम पर। जाने किस मिट्टी के बने हो, सीना ताने यूँ खड़े हो। सैकड़ों दुश्मनों की टोली पर, आग से बरस पड़े हो। इस चाटूकारिता की नीति से, फर्क तुम्हें भी पड़ता होगा। छोड़ चलूँ मैं ये वनवास, मन तुम्हारा करता होगा। देश बड़ा है ये कहकर, फिर तुम खुद को समझाते होगे। अनुशासन की पराकाष्ठा पर, फिर तुम खुद को पाते होगे। अपमान तुम्हारा करते हैं वो, जिनकी रक्षा तुम करते हो। पत्थर का जवाब गोली से देते, तुम इतना सहन क्यों करते हो। एक बार तो छोड़ो उन्ह...

मैं अकेला हूँ और अकेला चला जा रहा हूँ।

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मैं अकेला हूँ और अकेला चला जा रहा हूँ। था कारवाँ कभी साथ मेरे, पर आज कोई नहीं। थी जो महफ़िल कभी रोशन मुझसे, आज उसमें मैं नहीं। बने हालात कुछ ऐसे, कि खुद में सिमटने को मजबूर हुआ जा रहा हूँ। मैं अकेला हूँ और अकेला चला जा रहा हूँ।। वक्त का तकाज़ा था, कि जो अपने थे वो बिछड़ गए। मैं इस कोशिश में था कि गलती की गुंजाइश ना हो, और वो गलती करके निकल गए। मैं दूर खड़ा बस देखता रहा, वक्त के साथ हर कोई बदलता रहा। मैं आज भी वहीं हूँ, और लोगों को बदलते देख यूँ मुस्कुराता जा रहा हूँ। मैं अकेला हूँ और अकेला चला जा रहा हूँ।। आज थोड़ा बेबस, थोड़ा मजबूर हूँ मैं। अपनी मंजिल की तलाश में, खुद से ही बहुत दूर हूँ मैं। जाने कब खत्म होगी ये तलाश, मेरे मुकाम की। एक धुंधली सी उम्मीद लिए, मैं बस पिघलता जा रहा हूँ। मैं अकेला हूँ और अकेला चला जा रहा हूँ।। आज कुछ कमजोर हूँ, पर लाचार नहीं। बेशक मुझे जल्दी है सपनों की, पर किसी गुनाह का मैं तलबगार नहीं। रफ़्ता रफ़्ता ही सही , कभी तो आएगा वो खुशी का मन्ज़र। अपनी ख्वाहिशों को समेटे, बस चलता जा रहा हूँ। मैं अकेला हूँ और अकेला चला जा रहा ह...

मुझे आज भी याद है तेरा साथ चलना

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मुझे आज भी याद है तेरा साथ चलना, लेकर कुछ बहाना घर से निकलना । वो गलियों से होकर चौपले पर पहुँचना। तेरे कॉलेज तक साथ-साथ चलना, मुझे आज भी याद है तेरा साथ चलना।। वो बस भी हमनवां थी, हम दोनों की गवाह थी। कुछ तेरे कुछ मेरे, पगले से यारों की एक टोली थी। एक सीट जो कभी ना बिछड़ी हमसे, सिर्फ अपनी थी। कैसे भूल जाऊँ मैं वो सब, कैसे भूल जाऊँ मैं तेरे संग बैठना। मुझे आज भी याद है तेरा साथ चलना।। वो तेरा भोलापन, वो तेरी सादगी। वो तेरा मुस्कुराना और यूँ खिलखिलाना। मैं खो चुका था तुझमें, और जी रहा था तुझको। वो सुनहरे दिन और गुलाबी रातें, वो खुद से बस तेरी बातें करना। मुझे आज भी याद है तेरा साथ चलना।। एग्जाम तो एक बहाना था, लखनऊ तक ही सही मगर तेरे साथ जाना था । तेरे साथ बिताए उन पलों का एहसास ही काफी था। और क्या चाहिए था बस तेरा साथ ही काफी था । मुझे हरदम भाता था तेरे संग यूँ घूमना, मुझे आज भी याद है तेरा साथ चलना।। मेरे लिए तेरा सबसे झगड़ना। अपने कॉलेज के टूर पे मुझे एडजस्ट करना । मेरी मार्कशीट के लिए क्लर्क से लड़ना। मेरे हर काम को यूँ तन्मयता से ...

ऐ बारिश ज़रा जम के बरस

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ऐ बारिश जरा जम के बरस, मिलने दे इस पानी में मेरी आँखों का ये पानी। छिपा है सैलाब जो अंदर, वो आज टपकेगा बनकर खारा पानी। बहा ले जा संग अपने मेरे एहसासों की ये दुनिया, लिखूँ मैं नई ज़िन्दगी फिर से, और शुरू करूँ एक नई कहानी। धुलेंगी आज यादें कुछ पुरानी, उन्हें धुलने दे ज़रा। ना रोक इन बादलों को, तू बरसने दे ज़रा। बड़ी गहरी जड़ें जमाए बैठे हैं, मेरे दिल में कुछ एहसास। तू बना तूफान सा कोई मंज़र, और इन्हें उखड़ने दे ज़रा। फिसलने दे इन बूँदों को मेरे तन पर, पहुँचने दे रूह की गहराई तक। मैं खड़ा हूँ बाँहें फैलाये भीगने को तुझमें, तू सराबोर कर दे मुझे और भिगो डाल मेरी परछाईं तक। मैं तुझमें घुलने को तैयार बैठा हूँ, बस तू यूँ ही जारी रहना मेरे एहसासों की भरपाई तक। यूँ टुकड़ों में ना बरस, ऐसे तो मैं भी आधा-अधूरा सा हूँ। कभी ऊँचा उड़ता इन बादलों में, तो कभी गिरा-गिरा सा हूँ। आज तुझे अपने आगोश में समेट लूँ जी भर के, तू यूँ ना तरसा मुझे, मैं खुद इस सूनेपन से हारा-हारा सा हूँ। आज तू कुछ ऐसे बरस, कि मैं खुद को भूल जाऊँ। सराबोर कर दूँ खुद को तुझमें, और तेरी बाँहों में ...