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हर उम्मीद मेरी धुआँ-धुआँ जली है

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हर उम्मीद मेरी धुआँ-धुआँ जली है। ना जाने मेरी किस्मत मुझे कहाँ ले चली है। मैं सँभला हूँ हर बार अपने दम पर यूँ गिर-गिर कर, अब तो लगता है मेरी किस्मत के दीये की लौ ही कम जली है। हर बार मेरे सपने कुछ यूँ बिखर जाते हैं। मैं समेटता हूँ किलो से और वो कुन्तलों से गिर जाते हैं। अब थक सा गया हूँ इन ख्वाबों को सहेजते-सहेजते, मैं सजाता हूँ इन्हें कई रंगों से, और ये बड़ी खामोशी से उजड़ जाते हैं। उम्मीद की एक लौ जलती है, और बुझ जाती है। किनारे पर आकर ही मेरी कश्ती, जाने क्यों पलट जाती है। मैं फिर से फँस जाता हूँ किस्मत के इस भँवर में, पिरोता हूँ सपनों को मैं जिस डोर में, वो एक झटके से टूट जाती है। ऐ किस्मत तू खामोश क्यों है, कुछ तो जवाब दे। की है मैंने जो इतनी मेहनत, उसका कुछ तो हिसाब दे। जानता हूँ तेरे भरोसे बैठना बेवकूफी है, लेकिन नींद से खाली मेरी इन रातों का कुछ तो हिसाब दे। निराशा के सागर में डूबा हूँ, और डूबता जा रहा हूँ। खो दिया है मैंने खुद को इस सफर में, और खोता जा रहा हूँ। मैं निकला था मंजिल की तलाश में एक कारवाँ लेकर, कुछ ने मुझे भुला दिया, औ...

शायद तेरे जाने की वजह है

क्यों आज फिर से खामोश हूँ मैं, शायद तेरे जाने की वजह है। एक अजीब सी उदासी छायी है, शायद तेरे जाने की वजह है। जुड़ा नहीं मैं आज खुद से ही, अंदर कुछ टूट रहा है शायद। टूट कर बिखर रहा है आशियाना मेरा, कोई तूफान उठा है शायद। ना रोक सका मैं उदासी भरे उस लम्हे को, तुझसे कुछ उम्मीद थी शायद। एहसास तुझे भी रहा होगा मेरे जज़्बातों का, ये मेरी भूल थी शायद। कुछ यूं गुजरती हैं शामें मेरी, अब तेरे जाने के बाद। गुमसुम सा रहता हूँ, है बस तेरी यादों का साथ। कुछ खोया सा कुछ डूबा सा, तेरी यादों के समुन्दर में। लिए किनारे की उम्मीद कुछ यूँ बैठा हूँ। लौट कर आएगी फिर वो कश्ती, इंतज़ार किये बैठा हूँ। खामोशी भरी रात, उसपे ये बारिश का पानी। आसमाँ भी सुना रहा हो मानो कोई कहानी। तेरा भी कोई अपना गया है दूर शायद, जो यूँ रोये जा रहा है। आ बांट ले गम अपना, क्यों आंसू पे आंसू गिराए जा रहा है । आ मिल बैठें कुछ देर, इस भीगे से मौसम में। कुछ तू सुना अपनी, कुछ मैं सुनाऊँ। बहाना भी है आंसुओं को छुपाने का, कुछ तू भीगा सा है कुछ मैं भीग जाऊँ। यूँ ही चलती रहे ये रात, दिन में कुछ अजीब सा लगत...